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प्रोफ़ेसर डॉ. रेनू को मिला अवॉर्ड

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एनबीटी न्यूज, ग्रेनो इंडिया हैबिटेट सेंटर में उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख संस्था इफको की तरफ से आयोजित श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको युवा साहित्य अवार्ड गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रफेसर डॉ. रेनू यादव को मिला। ये अवार्ड उनकी कहानी संग्रह 'काला सोना' के लिए प्रदान किया । इफको प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी के मार्गदर्शन में प्रोफेसर असग़र वजाहत, मानव संसाधन एवं विधि के निदेशक राकेश कपूर, संयुक्त प्रबंध निदेशक रेखा अवस्थी और वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी ने रेनू यादव को शॉल, एक प्रतीक चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और ढाई लाख रुपये का चेक प्रदान किया। डॉ. रेनू यादव भारतीय भाषा एवं साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में डॉ अंबेडकर के विचारों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

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गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी "डॉ. अम्बेडकर का आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान: प्रभाव और इसकी आज की प्रासंगिकता" का समापन सत्र अत्यधिक उत्साह और चर्चा के साथ सम्पन्न हुआ। इस संगोष्ठी का उद्देश्य डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा आधुनिक भारत के निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान की समीक्षा और इसके वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संदर्भों में पुनर्मूल्यांकन था।मुख्य अतिथि आकाश पाटिल , डायरेक्टर डॉ अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर , मिनिस्ट्री ऑफ़ सोशल जस्टिस ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने संविधान निर्माण में जो योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में रहेगा। बाबा साहब जी के योगदान को समझने के लिए भारत सरकार के द्वारा निर्मित डॉ अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर का भ्रमण हर के नागरिक को करना चाहिए जहां सीखने की कोई सीमा नहीं है साथ ही उन्होंने ने कहा कि बच्चे आजकल कार्टून पत्रों में अपना सुपर हीरो देखने की जगह जब की इस देश की स्वतंत्रता के लिए जिन्होंने अपना योगदान दिया उनकी वीरगाथा को से भी प्रेरणा लेनी चाहिए । इस संगोष्ठी में विद्वानों और प्रमुख वक्ताओं, एक उत्साही डेमोक्रेट के रूप में अम्बेडकर-संवैधानिक लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के मुद्दे , भारत के आर्थिक विकास में डॉ. अम्बेडकर का योगदान- कृषि अर्थव्यवस्था, भूमि का राष्ट्रीयकरण, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों की अवधारणा, आरबीआई और श्रम कानून आदि मुद्दे ,सामाजिक परिवर्तन और परिवर्तन में डॉ. अम्बेडकर का योगदान और सामाजिक समावेशन का उनका विचार, जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि डॉ. अम्बेडकर के विचार आज भी सामाजिक समानता, मानवाधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनके दृष्टिकोण ने भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक न्याय प्रणाली को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में “हरित ऊर्जा पदार्थ और प्रौद्योगिकी” पर एक सप्ताह का संकाय विकास कार्यक्रम

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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में “हरित ऊर्जा पदार्थ और प्रौद्योगिकी” पर 23 सितंबर से 27 सितंबर, 2024 तक निर्धारित एक सप्ताह का संकाय विकास कार्यक्रम एफडीपी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संकाय विकास कार्यक्रम संयुक्त रूप से एप्लाइड फिजिक्स विभाग, स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड एप्लाइड साइंसेज, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय जीबीयू उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित, ग्रेटर नोएडा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्थापित द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। ।माननीय कुलपति प्रोफेसर आर.के. सिन्हा समापन सत्र के मुख्य अतिथि थे। डॉ। एप्लाइड फिजिक्स विभाग के प्रमुख आशीष कुमार केशरी ने माननीय कुलपति, स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड एप्लाइड साइंसेज के डीन प्रो. एन पी मेलकानिया और एनआईटीटीटीआर की ओर से इस एफडीपी के समन्वयक प्रोफेसर पंकज शर्मा का पुष्प भेंट कर स्वागत किया। डॉ आशीष कुमार केशरी एवं डॉ विवेक कुमार शुक्ला एप्लाइड फिजिक्स विभाग, गौतम बुद्ध विश्वविद्याल और डॉ. अशोक कुमार एवं प्रोफेसर पंकज शर्मा एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़, इस कार्यक्रम के समन्वयक थे। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय के आसपास एआईसीटीई द्वारा अनुमोदित कॉलेजों और अन्य सरकारी संगठनों के 67 प्रतिभागियों ने इस संकाय विकास कार्यक्रम में भौतिक रूप से में भाग लिया।इस एक सप्ताह के कार्यक्रम ने संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अद्यतन ज्ञान और कौशल से सुसज्जित किया, स्थायी प्रथाओं और उन्नत तकनीकी समाधानों को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम के द्वारा भौतिकी, रसायन विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, खाद्य प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और उद्योग के पेशेवरों के बीच नेटवर्किंग कर हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भविष्य में सम्भावित सहयोग और अनुसंधान सुनिश्चित किया गया विभिन्न विषयों के प्रतिभागियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया प्रदान की, जिसमें शामिल विषयों की प्रासंगिकता और उनके शोध में हरित ऊर्जा अवधारणाओं को एकीकृत करने के महत्व पर जोर दिया गया।विभिन्न प्रसिद्ध संगठनों के वक्ताओं ने हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकी में अद्यतन प्रगति और चुनौतियों पर अंतर्दृष्टि साझा की। सम्मानित वक्ताओं में डॉ अशोक कुमार, एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़, प्रोफेसर पंकज शर्मा, एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़, प्रो अश्वनी कुमार, एनआईटी कुरूक्षेत्र, डॉ सुनील सिंह कुशवाहा, प्रधान वैज्ञानिक, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, नई दिल्ली, प्रो. सुशांत सिन्हा रॉय, शिव नादर विश्वविद्यालय, प्रो. सुनीता शर्मा, गलगोटिया विश्वविद्यालय, डॉ. अमरीश कुमार पंवार, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, डाॅ. नेहा शर्मा, एमिटी यूनिवर्सिटी, प्रो. अनिल कुमार, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और प्रो. प्रमोद कुमार सिंह, शारदा विश्वविद्यालय रहे । शामिल विषयों में ऊर्जा भंडारण के लिए नैनोमटेरियल, मिश्रित पदार्थ , हाइड्रोजन उत्पादन और अनुप्रयोग, हाइड्रोजन उत्पादन के लिए फोटो-इलेक्ट्रो-रासायनिक जल विभाजन, हरित ऊर्जा हेतु हाइड्रोजेल, सुपरकैपेसिटर, लीथियम और सोडियम आयन बैटरी, वैज्ञानिक पांडुलिपि लेखन और भारतीय ज्ञान प्रणाली शामिल रहे ।इस संकाय विकास कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. विवेक कुमार शुक्ला के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ एफडीपी कार्यक्रम समाप्त हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति, अनुसंधान विद्वान, सहायक और तकनीकी कर्मचारी-जिनकी कड़ी मेहनत से यह आयोजन संभव हो सका, उन सभी का ह्रदय से आभार व्यक्त किया। आज के समापन सत्र में सभी प्रतिभागी और कुछ अतिथि उपस्थित रहे । मुख्य रूप से डॉ. भावना जोशी, डॉ. मनमोहन सिंह, डॉ. मौसमी पोहित, डॉ. वीनस डिल्लू , डॉ. सुदिष्ट कुमार, डॉ. आलेश कुमार, डॉ. रचना शर्मा, डॉ. उपमा सिंह, डॉ. जया मैत्रा सहित । डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. अनुराग सिंह बघेल, डॉ. एचसी ठाकुर, डॉ. विमलेश कुमार, डॉ. जसवेंद्र त्यागी, डॉ. आरबी सिंह, डॉ. ओमवीर सिंह, डॉ. आशा पांडे, डॉ. नितिन सोनकर, डॉ. महेश कुमार, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. विनीत शर्मा, डॉ. कोमल, डॉ शिव शंकर, रवींद्र, शिवांगी, मानव कुमार शर्मा, रेखा कुमारी, ज्योति, प्रवीण शामिल रहे।

जीबीयू ने यूपी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार शो के "कौशल विकास में अकादमी और उद्योग के सहयोग की सफलता: एक पहल" सत्र की अध्यक्षता की

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ग्रेटर नोएडा। यूपी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार शो के दूसरे दिन, इंडिया एक्सपो मार्ट में "कौशल विकास में अकादमी और उद्योग के सहयोग की सफलताः एक पहल " विषय पर एक ज्ञान सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो रविन्द्र कुमार सिन्हा, कुलपति, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने की । इस कार्यक्रम में पांच विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्रों में कौशल विकास को बढ़ावा देने और उद्योग के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए अपनाई गई "सर्वश्रेष्ठ उद्योग - अकादमी सहयोग प्रथाओं" को प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालयों ने अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में औद्योगिक सहयोग को उजागर किया और उद्योग जगत से तालमेल कर नये पाठ्यक्रमों को चलाने की मंशा उद्धृत की और उद्योग जगत भी इसमें बढ़चढ़ कर आगे आयें। इस अवसर पर प्रोफेसर पार्थ चटर्जी, डीन एकेडमिक्स, शिव नादर विश्वविद्यालय; राकेश सिंह, वीपी- प्लेसमेंट, बेनेट विश्वविद्यालय; डॉ. भूवनेश कुमार, डीन रिसर्च, शारदा विश्वविद्यालय; प्रोफेसर संजीव बंसल, अतिरिक्त प्रो वाइस चांसलर, एमीटी विश्वविद्यालय और डॉ. शक्ति साही, आईपीआर सेल की प्रमुख, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व किया एवं विस्तार पूर्वक अपने अपने विश्वविद्यालय के उद्योग जगत से संबंधित पाठ्यक्रमों से अवगत कराया | अपने अध्यक्षीय उदबोधन में जीबीयू के कुलपति प्रो रविन्द्र कुमार सिन्हा ने अकादमिक संस्थानों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, उद्योगों और अन्य हित धारकों के बीच संसाधनों के उचित उपयोग के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा ज्ञान और नवाचार क्लस्टर ( NGN KIN) के गठन पर भी प्रकाश डाला और कहा कि यह समय की माँग है और हमें आगे इस विषय पर विमर्श करना होगा। इस कार्यशाला में जीबीयू का प्रतिनिधित्व कर रही डॉ शक्ति साही ने कहा कि यह कार्यक्रम कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाई गई एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम में डॉ साही के साथ प्रबंधन विभाग के डॉ सतीश कुमार मित्तल एवं कंप्यूटर साइंस विभाग के डॉ अर्पित भारद्वाज ने विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया।

जीबीयू उत्तर प्रदेश में प्रमुख आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स हब के रूप में उभरे की तैयारी में है

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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) को उत्तर प्रदेश में आर्टिफिसियल इन्टेलिजन्स (एआई) के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में स्थायी रूप से स्थापित रहा है, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश एवं चांसलर, जीबीयू श्री योगी आदित्यनाथ जी ने जीबीसी 4.0 के चौथे संस्करण के दौरान की। चांसलर श्री योगी आदित्यनाथ जी ने बताया कि जीबीयू, लखनऊ के साथ, राज्य के एआई पहलों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में चयनित किया गया है, जो विश्वविद्यालय की नवाचार और शैक्षिक उत्कृष्टता के पथ में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का संकेत है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा किए गए एलान ने एक नई सहयोग और विकास की युग का आरम्भ किया है, जिससे गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय को आर्टिफिसियल इन्टेलिजन्स में परिवर्तनात्मक उन्नतियों के लिए एक उत्तेजक के रूप में स्थान दिया गया है। यूनिवर्सिटी के एकमात्र संस्थान के रूप में एआई हब को एक नई आयाम देने के लिए चयन किया जाना इसकी शैक्षिक प्रतिष्ठा और इस क्रियात्मक क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए तैयारी को पुनः साबित करता है।जीबीयू के चांसलर और मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा किए गए एलान ने एक नए सहयोग और विकास की युग का आरम्भ किया है, जिससे गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय को आर्टिफिसियल इन्टेलिजन्स में परिवर्तनात्मक उन्नतियों के लिए एक उत्तेजक के रूप में स्थान दिया गया है। यूनिवर्सिटी के एकमात्र संस्थान के रूप में एआई हब को आवास देने के लिए चयन का इस्तेमाल इसकी शैक्षिक प्रतिष्ठा और इस क्रियात्मक क्षेत्र में कट्टर अनुसंधान और विकास के लिए तैयारी को पुनः साबित करता है। इस महत्वपूर्ण निवेश और सरकारी समर्थन के साथ, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के पास एलान वृद्धि करने की शक्ति है, जिससे समाजिक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है, आर्थिक विकास को गति दी जा सकती है, और अगली पीढ़ी को सशक्त किया जा सकता है। जीबीयू में एआई केंद्र एक विषय- संगठनात्मक सहयोग का केंद्र होगा, जो शैक्षणिक, उद्योग, और सरकार से विशेषज्ञों को एक साथ लाकर जटिल समस्याओं का सामना करने और विभिन्न क्षेत्रों में नई अवसरों को खोलने में सहायक होगा। विश्वविद्यालय के एआई परिदृश्य में यूनिवर्सिटी की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बोलते हुए, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवीन्द्र कुमार सिन्हा ने इस पहल के परिवर्तनात्मक क्षमता के बारे में गहरी आशा व्यक्त की। हमें गर्व है कि हमें उत्तर प्रदेश की एआई प्रयासों को नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है । यह महत्वपूर्ण घोषणा केवल जीबीयू की शैक्षणिक उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में पुनः पुष्टि करती है, बल्कि हमारे तकनीक को बढ़ावा देने के लिए हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। एआई सेंटर की स्थापना के साथ, हम नवाचार को तीव्रता से आगे करने, अब तक के अनुसंधान को निर्देशित करने, और उन्नतता को पोषण देने का लक्ष्य रखते हैं, जो एआई के भविष्य को विश्वविद्यालय एवं प्रदेश को आकार देने में मददगार साबित होगी। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में एआई केंद्र की स्थापना, आईए के विश्वस्तरीय मंच में नवाचार द्वारा विकासशील वृद्धि और उत्तर प्रदेश को एक ग्लोबल आई परिदृश्य में प्रमुख रूप से स्थापित करने व्यापक दृष्टिकोण के साथ मेल खाती है। राज्य की समृद्ध टैलेंट पूल और सहकारी पारिस्थितिकी का उपयोग करके, यह पहल विश्वसनीय आर्थिक विकास को प्रेरित करने, निवेश आकर्षित करने और उत्तर प्रदेश को एआई-प्रेरित नवाचार और उद्यमिता का केंद्र स्थानित करने के लिए तैयार है। प्रो. सिन्हा ने जोड़ा कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा और उत्तर प्रदेश में एक अग्रणी शैक्षणिक संस्थान है और इसे शैक्षिक उत्कृष्टता, अनुसंधान नवाचार, और सामाजिक विकास कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है और पूर्ण विकास की देखभाल करने के साथ नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जीबीयू अपने शिक्षा और शिक्षण तकनीकों के माध्यम सकारात्मक परिवर्तन को नेतृत्व करने के लिए एक कैटलिस्ट के रूप में काम करता है।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मनोविज्ञान के क्षेत्र में नई चिकत्सा विधि विकसित किया ।

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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय GBU के शिक्षक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रताप सिंह और उनकी शोध छात्रा आकृति वार्ष्णेय, ने मनोविज्ञान के क्षेत्र में एक नई विधा विकसित की है, जिसे ‘न्यूरो-कोग्निटिव प्लास्टिसिटी थेरेपी’ (NCPT) का नाम दिया गया है। इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार के बौद्धिक संपदा विभाग द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है और आधिकारिक रूप से कॉपीराइट प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है।NCPT मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोलॉजिकल विकारों के उपचार में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। यह विधा मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ावा देने और नए न्यूरल कनेक्शन्स को बनाने में सहायता करती है, जो मानसिक विकारों से ग्रस्त रोगियों के लिए एक प्रभावी उपचार का विकल्प हो सकता है।इस उपलब्धि से न केवल GBU के शोधकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है, बल्कि यह भारत के चिकित्सा मनोविज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। NCPT मूल रूप से न्यूरोफीडबैक थेरेपी एवं कॉग्निटिव थेरेपी का एक समेकित रूप है जिसके द्वारा मरीजों का उपचार कम समय में ही प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। यह उपचार एक वैज्ञानिक, वस्तुनिष्ट एवं एविडेंस बेस्ड चिकत्सा पद्धति पर आधारित है। दोनो ही शोधकर्ताओं का कहना है की वो इस विधा के प्रयोग को और विस्तारित करेंगे और आने वाले समय में इसके बहुआयामी उपयोग के लिए शोध कार्य करते रहेंगे। ज्ञात हो की गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय मनोविज्ञान के शिक्षा के क्षेत्र में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर पर उभरा है और पूरे देश में मनोविज्ञान के क्षेत्र में प्रमुख स्थान रखता है। दोनो शोधकर्ताओं ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है और विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो रविन्द्र कुमार सिन्हा, कुल सचिव डॉ विश्वास त्रिपाठी, संकाय की डीन प्रो बंदना पांडे का विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त सभी सहयोग के लिए आभार प्रकट किया।

राष्ट्रीय सेवा योजना स्वयंसेवकों द्वारा जीबीयू में मनाया गया स्वच्छता पखवाड़ा समारोह

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देश में स्वच्छता और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए भारत के चल रहे प्रयासों के एक हिस्से के रूप में, स्वच्छता ही सेवा 2024 अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। इस संबंध में, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के स्वयंसेवक स्वच्छता पखवाड़ा मना रहे हैं, जो 17 सितंबर से शुरू होकर 02 अक्टूबर 2024 तक चलेगा। इस उल्लिखित अवधि के दौरान, एनएसएस स्वयंसेवकों ने परिसर, छात्रावास, औषधालय, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, निवास क्षेत्र, ग्राम, कस्बे, शहर और सभी संभव कार्य स्थलों को साफ रखने की शपथ ली। इस के अलावा, उन्होंने खेल मैदान, इंजीनियरिंग वर्कशॉप पार्किंग स्थल जैसे कुछ महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों की भी सफाई की है। आज दिनांक (20.09.24), उन्होंने स्वच्छता रैली का आयोजन किया और उसमें भाग लिया। इस रैली का उद्देश्य अन्य युवा छात्रों, कर्मचारियों और संकाय सदस्यों को स्वच्छता और स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करना है, जो पृथ्वी और जीवन को स्वस्थ रखने के लिए हमारे लिए महत्वपूर्ण है। छात्रों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह राठौड़, एडिशनल डायरेक्टर, इंटरनेशनल रिलेशन, जीबीयू, कार्यक्रम समन्वयक, डॉ जे. पी. मुयाल एवं कार्यक्रम अधिकारी, डॉ. अल्पा यादव, डॉ. अजय कंसल, डॉ। प्रियंका गोयल, और डॉ. नवीन कुमार उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह राठौड़ और डॉ. जे. पी. मुयाल ने जीबीयू परिसर और आसपास को स्वच्छ बनाने में स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की है। डीन स्टूडेंट अफेयर डॉ. मनममोहन सिंह ने सभी स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं और स्वच्छता पखवाड़ा 2024 के आयोजन के लिए एनएसएस टीम को बधाई दी। साथ ही माननीय कुलपति प्रो. आर.के. सिन्हा एवं रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी ने एनएसएस टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ जस्टिस एंड गवर्नेंस द्वारा राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता, 14-15 सितम्बर 2024 का हुआ समापन सत्र

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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ जस्टिस एंड गवर्नेंस द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के दूसरे दिवस का आयोजन 15 सितम्बर , 2024 को हुआ। । फाइनल राउंड होने के पश्चात समापन सत्र सम्पन हुआ । समापन सत्र के प्रारम्भ में स्कूल के अधिष्ठाता डॉ. के. के. द्विवेदी द्वारा स्वागत वक्तव्य दिया गया जिसमें उन्होंने सभी आमंत्रित विद्वतजनों का स्वागत किया । कार्यक्रम को आगे बढाते हुए सम्मानीय अतिथि माननीय जस्टिस विनय कुमार माथुर ,सेवानिवृत्त न्यायधीश ,इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने वक्तव्य में कोर्ट में ड्राफ्टिंग और बहस के लिए किसी भी स्थिति में समाज के बदलते बदलाव से जुड़े रहने की निरंतर आवश्यकता को ज़रूरी बताया Iउन्होंने कहा कि विधि विशेषज्ञ को इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र और अन्य सभी विषयों का ज्ञान होना चाहिए और इस प्रतियोगिता में जीतने या हारने से ज्यादा महत्व भागीदारी का होता है । इसके उपरांत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय जस्टिस पी के श्रीवास्तव ,चेयर मैन, विधि आयोग उत्तर प्रदेश ने अपने वक्तव्य में कहा कि कानून के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के गुणों की आवश्यकता होती है जिसमें राष्ट्र की सेवा को सर्वोपरि ध्यान में रखना चाहिए। यह विधि के हित को ध्यान में रखने का समय है।तत्पश्चात् माननीय श्री जस्टिस मनोज कुमार ओहरि,जज, दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने विशिष्ट वक्तव्य में कहा उन्होंने प्रतिभागियों को हमेशा मेहनती रहने और असफलताओं से निराश न होने की सलाह दी। उन्होंने स्वस्थ और नियमित मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं के महत्व के बारे में बात की क्योंकि वे प्रतिभागियों को अपने प्रस्तुतीकरण कौशल और अदालतों को संबोधित करने की उनकी क्षमता में सुधार करने में मदद करते हैं।इसके उपरांत गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो .रविन्द्र कुमार सिंहा ने अध्यक्षीय भाषण में कहा की तकनीकी विकास के आज के युग में कानून सीखना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि तकनीकी विकास कानून को चुनौती देता है ।अंत में स्कूल की सहायक प्राध्यापिका तथा विभाग्याध्यक्ष डॉ. रमा शर्मा ने प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा करते हुए सबको शुभकामनाएं दी और अंत में कार्यक्रम की संयोजक डॉ ममता शर्मा ने सभी सम्माननिय अथितियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने के लिए संकाय के अधिष्ठाता डॉ. के. के. द्विवेदी, विभाग्याध्यक्ष तथा संयोजक डॉ रमा शर्मा, शिक्षक गण डॉ. अक्षय सिंह, डॉ.सतीश चंद्रा, डॉ. प्रकाश चंद्र दिलारे ,डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. अनिता यादव, डॉ. विक्रम करुणा, डॉ. संतोष तिवारी ,डॉ. पूनम वर्मा, डॉ. सुमित्रा हुईड्रोम , डॉ. अखिलेश,डॉ सी. बी भरास, श्री सागर, श्री उत्कर्ष, श्री हबीब, सुश्री प्रिया , सुश्री सौम्या, सुश्री सुजाता , सुश्री यामिनी तथा अपने विद्यार्थियों के सहयोग तथा समर्थन के लिए आभार प्रकट किया ।इस प्रतियोगिता के विजेता रहे एन एल यू राँची ,रनरअप रहे, आर्मी इन्स्टिटूट ओफ़ लॉ ,बेस्ट स्पीकर रहीं तृप्ति श्रीवस्ताव लॉयड कॉलेज तथा बेस्ट मेमोरियल रहे अग्रसेन इन्स्टिटूट ओफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ ।इस मूट कोर्ट प्रतियोगिता के मुख्य संरक्षक, माननीय कुलपति प्रो .रविन्द्र कुमार सिंहा, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय हैं। तथा इस कार्यक्रम के संयोजक गण स्कूल की सहायक प्राध्यापिका डॉ. ममता शर्मा, डॉ.रमा शर्मा हैं।इस कार्यक्रम में देश के कोने कोने से 54 टीम्स और लगभग 100 से अधिक छात्र छात्राओं ने भागीदारी लिया अंतिम दौर की अध्यक्षता माननीय न्यायमूर्ति मिस ज्योति सिंह न्यायाधीश दिल्ली उच्च न्यायालय, माननीय श्री न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी, न्यायाधीश दिल्ली उच्च न्यायालय और माननीय श्री न्यायमूर्ति विनय कुमार माथुर सेवानिवृत्त न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने की।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता तथा अन्य शिक्षक गण द्वारा भी भाग लिया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो .रविन्द्र कुमार सिंहा, कुलसचिव, डॉ. विश्वास कुमार त्रिपाठी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विधि विभाग के शिक्षकों और छात्र छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनएँ प्रेषित किया I

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जीबीयू के 160 पाठ्यक्रम पर प्रवेश शुरू, 10 नए पाठ्यक्रम जोड़े
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया शुरू, 10 नए पाठ्यक्रम किये शामिल
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2025-26 प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ ।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कुल 4,360 सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू
जीबीयू के नए कुलपति प्रो. राणा प्रताप के पास है 31 वर्षों के शोध का अनुभव