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बीईसीआईएल कार्यालय, सेक्टर 62, नोएडा में साइबर सुरक्षा के सुधार पर हुई चर्चा

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नोएडा: बीईसीआईएल कार्यालय, सेक्टर 62, नोएडा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रो. आर.के. सिन्हा, डॉ. अरुण सोलंकी, डॉ. आरती गौतम डिंकर, श्री कार्तिकेय तिवारी और बीईसीआईएल के प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई, जिसमें हाल के स्ट्रैटेजिक सैटेलाइट हैक्स और संभावित प्रतिक्रियाओं पर विचार किया गया और साइबर सुरक्षा उपायों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया गया। भारतीय नौसेना के साथ वर्तमान और आगामी साइबर फोरेंसिक्स परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्पेस स्टार्टअप्स के साथ सहयोग के अवसरों का अन्वेषण किया गया और कृषि आपदा प्रबंधन में रक्षा तकनीकों के एकीकरण पर विचार किया गया। साइबर फोरेंसिक्स पर केंद्रित एक श्रृंखला की पहल का प्रस्ताव रखा गया, और निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में संभावित सहयोग पर चर्चा की गई। बैठक में साइबर फोरेंसिक लैब स्थापित करने की योजनाओं की रूपरेखा दी गई और छात्रों के प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए लैब के महत्व पर जोर दिया गया। चल रहे अनुसंधान और विकास के प्रयासों पर बल देते हुए भविष्य की अनुसंधान परियोजनाओं पर चर्चा की गई। फोरेंसिक विज्ञान कार्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम डिजाइन और व्यावसायिक भागीदारी पर भी विचार-विमर्श किया गया। कंप्यूटर फोरेंसिक्स पर केंद्रित फैकल्टी विकास कार्यक्रमों का प्रस्ताव रखा गया और व्यापक कंप्यूटर फोरेंसिक प्रशिक्षण को लागू करने की विस्तृत योजनाओं पर चर्चा की गई। कार्यवाही के बिंदुओं में साइबर फोरेंसिक लैब की स्थापना की प्रक्रिया शुरू करने, क्षेत्रीय लैब्स की स्थापना की व्यवहार्यता का अन्वेषण करने, क्षमता निर्माण के लिए परामर्श और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विकसित और लॉन्च करने, और व्यावसायिक हितधारकों को शामिल करते हुए पाठ्यक्रम डिजाइन करने पर जोर दिया गया। फैकल्टी विकास कार्यक्रम और कंप्यूटर फोरेंसिक्स प्रशिक्षण की योजना और कार्यान्वयन के भी निर्देश दिए गए। अंत में, साइबर फोरेंसिक लैब की स्थापना पर फॉलो-अप करने, लैब विजिट और क्षेत्रीय लैब्स की स्थापना की योजना बनाने और स्पेस स्टार्टअप्स तथा रक्षा संबंधित परियोजनाओं के साथ सहयोग की चर्चाएँ जारी रखने का निर्णय लिया गया।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया स्टडीज विभाग में एक्टिंग ऑडिशन का आयोजन

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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया स्टडीज विभाग में राधे केशव इंटरटेनमेंट के सौजन्य से आज ‘एक्टिंग ऑडिशन’ का आयोजन किया गया। इस ऑडिशन में विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों और विभागों से छात्र- छात्राओं ने आकर ऑडिशन दिया। इस ऑडिशन के बाद स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज की डीन और जनसंचार एवं मीडिया स्टडीज विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर बंदना पांडेय ने बताया कि जनसंचार विभाग अपने विद्यार्थियों के छुपे तमाम टेलेंट को सबके सामने लाकर उन्हें प्रोफेशनल मार्गदर्शन भी प्रदान करता है साथ ही साथ रेडियो, टेलीविजन, फिल्म और अकादमिक जगत के प्रसिद्ध प्रोफेशनल्स भी आकर विभाग के विद्यार्थियों से रूबरू होते रहते हैं। इसी कड़ी में आज विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों को इस एक्टिंग ऑडिशन में भाग लेने का अवसर उपलब्ध कराया गया। गौरबतल है कि विश्वविद्यालय का जनसंचार एवं मीडिया स्टडीज विभाग अक्सर ऐसे आयोजन कर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का मौका देता है, जिसका लाभ सिर्फ जनसंचार विभाग के विद्यार्थी ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं को मिलता है। आज के इस ऑडिशन के सफल आयोजन में विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनीत कुमार, डॉ. बिमलेश कुमार, डॉ. कुमार प्रियतम शामिल रहे। वहीं राधे केशव इंटरटेनमेंट की तरफ से उसके प्रोड्यूसर सहित कई प्रोफेशनल लोगों ने उपस्थित होकर विद्यार्थियों का ऑडिशन लिया। इस ऑडिशन में एक्टिंग में रुचि रखने वाले जनसंचार विभाग के छात्र-छात्राओं सहित विश्वविद्यालय के अधिकांश विद्यार्थियों ने भाग लिया, जल्द ही इसमें चुने गए छात्र-छात्राओं को सूचना प्रदान की जायेगी,

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के अनुप्रयुक्त भौतिकी विभाग में क्वांटम संचार पर कार्यशाला

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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के व्यावसायिक अध्ययन और अनुप्रयुक्त विज्ञान संकाय के अनुप्रयुक्त भौतिकी विभाग ने वीपीआईफोटोनिक्स, नई दिल्ली के सहयोग से क्वांटम संचार पर जोर देते हुए फोटोनिक्स सिमुलेशन टूल्स पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। अनुप्रयुक्त भौतिकी विभाग की डॉ. वीनस डिल्लू ने फाइबरोनिक्स के संस्थापक और सीईओ श्री जसप्रीत सिंह का स्वागत किया और फोटोनिक्स सिमुलेशन टूल्स पर इस प्रशिक्षण सह प्रदर्शन कार्यशाला के बारे में कुछ जानकारी दी। श्री जसप्रीत सिंह ने वीपीआईफोटोनिक्स डिज़ाइन सूट™️ नामक फोटोनिक्स सॉफ़्टवेयर टूल का प्रदर्शन किया जो इंजीनियरों को विभिन्न फोटोनिक सिस्टम में प्रकाश के व्यवहार का अनुकरण करने की अनुमति देता है। इसका उपयोग नए उपकरणों को डिजाइन करने, मौजूदा उपकरणों को अनुकूलित करने और समस्याओं का निवारण करने के लिए किया जा सकता है। सॉफ्टवेयर न केवल फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस, बल्कि क्वांटम कुंजी वितरण जैसे उभरते क्षेत्रों को भी डिजाइन और अनुकरण करने की पेशकश करता है। वीपीआईफोटोनिक्स के उत्पादों का उपयोग कई तरह की कंपनियों और संस्थानों द्वारा किया जाता है, जिनमें अनुसंधान प्रयोगशालाएं, विश्वविद्यालय और दूरसंचार कंपनियां शामिल हैं। उनके सॉफ्टवेयर को फोटोनिक्स निर्माण के लिए उद्योग मानक माना जाता है। माननीय कुलपति प्रो. रवींद्र कुमार सिन्हा ने अतिथियों का अभिनंदन किया और इस अवसर पर अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। प्रो. एन.पी. मेलकानिया, डीन और स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड एप्लाइड साइंसेज से एप्लाइड फिजिक्स के विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार केशरी ने भी अपनी उपस्थिति से इस अवसर की शोभा बढ़ाई। ईसीई विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. विदुषी शर्मा, एप्लाइड फिजिक्स विभाग के सभी संकाय सदस्य और शोध छात्र भी इस कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी के साथ शामिल हुए।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ शुभारंभ

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ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का शीर्षक भारतीय ज्ञान प्रणाली के द्वारा मनोविज्ञान के लिए पाठ्यक्रम का विकास था। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉक्टर कैलाश नाथ शर्मा (अध्यक्ष विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान), तथा मुख्य वक्ता प्रोफ. गिरिश्वर मिश्रा (पूर्व कुलपति महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविध्यालय, वर्धा महाराष्ट्र) थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई । संगोष्ठी के संयोजक डाक्टर आनन्द प्रताप सिंह (अधक्ष्य मनोविज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग, गौतम बुद्ध विश्वविध्यालय) एवं डाक्टर विवेक कुमार मिश्रा (अधक्ष्य, हिंदू अध्ययन केन्द्र, गौतम बुद्ध विश्वविध्यालय) ने कार्यकर्म के मुख्य बिंदुओ पर प्रकाश डालते हुए मनोविज्ञान के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली के समावेश पर ध्यान इंगित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉक्टर कैलाश चन्द्र शर्मा ने बताया कि मनोविज्ञान विषय में मौजूद सिद्धांतो से जुड़े तथ्य विषय की उत्पत्ति से पहली भी मौजूद रहे हैं लेकिन पश्यचयात सिद्धांतो एवं मनोवैज्ञानिकों के प्रभाव के वजह से भारतीय ज्ञान की उपेक्षा की गई। उन्होंने बताया कि पश्यचयात और स्वदेशी विचारों को साथ साथ समान रूप से विषय में सम्मिलित होना चाहिए। इस अवसर पर संगोष्ठी के प्रमुख्य वक्ता प्रोफ. गिरीश्वर मिश्रा ने वेद एवं उपनिषदों में मौजूद तथ्यों के आधार पर पाठ्यक्रम के विकास पर जोर देते हुए बताया कि हमारी अपनी स्वदेशी ज्ञान, मनोवैज्ञानिक शोध एवं मनोवैज्ञानिक समस्यायों से निपटने की समझ को दिशा देने में सक्षम हैं। इसके अलावा विश्वविध्यालय के कुलपति प्रोफ़ रविन्द्र कुमार सिन्हा, अधिष्ठाता प्रोफ बंदना पांडेय ने सम्बोधित किया एवं कुलसचिव डॉक्टर विश्वास त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रोफ. धनंजय सिंह मेंबर ऑफ सेक्रेटरी आई. सी. एस. एस. आर, शामिल हुए एवं उन्होंने यह आश्वासन दिया कि आई. सी. एस. एस. आर के माध्यम से भारतीय ज्ञान पद्धति के क्षेत्र में शोध कार्य एवं छोटे छोटे शोधयोजनाओ के क्रियान्वयन के लिये लोगों को प्रोत्साहित किया। इस दो दिवसीय संगोष्ठी में लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया एवं देश के प्रमुख संस्थाओं जैसे आई. आई.टी. बॉम्बे, दिल्ली विश्विद्यालय, आई. आई. टी. खड़गपुर, कॉटन विश्वविद्यालय गुवाहाटी, NIMHANS इत्यादि संस्थाओं से विषय विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किया। कार्यकर्म में गौतम बुद्ध विश्विद्यालय के अधिष्ठाता, विभागाधक्ष्य, संकाय सदश्य एवं भरी मात्रा में छात्र – छात्राएं भाग लिए।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने विश्व पर्यावरण दिवस 2024 को “सस्टेनेबल सेलिब्रेशन” के रूप में मनाया

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ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड एप्लाइड साइंसेज (USoVSAS) के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने विश्व पर्यावरण दिवस 2024 को बड़े उत्साह के साथ मनाया। यह दिन वैश्विक रूप से ऐतिहासिक “1972 संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन” की याद में मनाया जाता है, जो स्टॉकहोम, स्वीडन में आयोजित पहला वैश्विक पर्यावरण शिखर सम्मेलन था, जिसका उद्देश्य पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा और बहाली को बढ़ावा देना और पर्यावरणीय चुनौतियों, मानवजनित जलवायु परिवर्तन और बिगड़ती वैश्विक पर्यावरणीय स्थितियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह कार्यक्रम, जो 51वें विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करता है, में पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को प्रस्तुत किया गया, जैसे कि गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत पर्यावरणीय रूप से सस्टेनेबल गुलदस्तों के साथ। एक पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें अत्यधिक सूचनात्मक और शिक्षाप्रद पोस्टरों को प्रदर्शित किया गया, जहां प्रोफेसर एन.पी. मलकनिया, अधिष्ठाता एकेडेमिक्स, जीबीयू और अधिष्ठाता, USoBT और USoVSAS ने पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कानूनों और नीतियों के विकास और “नक्षत्र वाटिका”, “राशि वाटिका”, “नवग्रह वाटिका” जैसे विविध देशी पौधों की प्रजातियों के महत्व को समझाया, साथ ही घर और रसोई बगीचों में आसानी से उगाए जा सकने वाले सांप-प्रतिरोधक और सांप-आकर्षक पौधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने संस्थान के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को भी उजागर किया। सम्मानित मुख्य अतिथि, प्रोफेसर रविंद्र कुमार सिन्हा, GBU के कुलपति, ने छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत की और विभागीय वॉल मैगज़ीन “इकोवर्स” के दूसरे संस्करण का अवलोकन किया, जो “भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा प्रतिरोधकता” के विषय के साथ मेल खाता है। कार्यक्रम का औपचारिक आरंभ देवी सरस्वती की प्रार्थना, एक औपचारिक दीप प्रज्वलन और गणमान्य व्यक्तियों को पर्यावरण के अनुकूल स्मृतिचिह्नों के साथ सम्मानित करने के साथ हुआ, जिसमें हर कदम पर प्लास्टिक के उपयोग को कम से कम किया गया। अपने स्वागत भाषण में, प्रोफेसर मलकनिया ने 2024 को “सस्टेनेबिलिटी के लिए सुपर वर्ष” के रूप में जोर दिया, जिसमें छह प्रमुख वैश्विक पर्यावरणीय घटनाओं का उल्लेख किया गया, जिनमें रियो सम्मेलनों और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा शामिल हैं। उन्होंने ऐतिहासिक पर्यावरणीय मुद्दों जैसे स्कैंडेनेविया में अम्लीय वर्षा और जर्मनी के जंगलों के पतन पर चर्चा की और कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने में राचेल कार्सन के अग्रणी कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के पर्यावरणीय पक्ष की सराहना की, जो भारत को पर्यावरण कारणों के लिए विकासशील राष्ट्रों का वैश्विक प्रतिनिधि बनाने में सहायक रही, और इसे भारत में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के उदाहरण से सत्यापित किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के अधिनियम का उल्लेख किया, जो 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के परिणामस्वरूप था, और अपनी बातचीत में ए.जे.पी. टेलर के एक प्रसिद्ध उद्धरण “कुछ भी अनिवार्य नहीं होता जब तक यह घटित नहीं होता” का उल्लेख किया। अपनी बुद्धिमत्तापूर्ण बातों को मिट्टी के एक बर्तन और उसके उलट जाने पर उसके बाहर फैलने के उदाहरण से समाप्त करते हुए उन्होंने कहा, “समस्याएं छोटी होती हैं लेकिन इसके परिणाम दीर्घकालिक होते हैं।” माननीय प्रोफेसर सिन्हा ने अपने संबोधन में विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने के लिए आयोजकों की सराहना की और समय पर आयोजनों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन की वकालत की और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में पर्यावरण शिक्षा को शामिल करने की सराहना की। उन्होंने B.Sc. पर्यावरण विज्ञान की शुरुआत के लिए GBU की पहल को उजागर किया और विभिन्न विषयों में पर्यावरण शिक्षा के एकीकरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने जोर दिया कि अन्य क्षेत्रों में चल रहे अनुसंधान को स्थिरता के विचार के साथ संरेखित करना चाहिए, क्योंकि पर्यावरण की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रोफेसर सिन्हा ने पर्यावरण पर प्रौद्योगिकी के प्रभावों को कम करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया, और दर्शकों को वाहनों के उपयोग को कम करने और वृक्षारोपण अभियानों को बढ़ावा देने जैसी पहलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्य अतिथि, प्रोफेसर आर.के. सिन्हा के प्रेरणादायक संबोधन के बाद एक विचार-विमर्श और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें दर्शकों में शामिल फैकल्टी सदस्यों और छात्रों ने विभिन्न महत्वपूर्ण और प्रासंगिक मुद्दों को उठाया। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में समृद्ध जैव विविधता, वर्षा जल संचयन प्रणाली और बड़े सौर पैनल इंस्टॉलेशन हैं जो इसे एक स्थायी परिसर बनाते हैं। इसके बावजूद, इस संबंध में आगे सुधार के सुझावों पर माननीय कुलपति ने ध्यान दिया, जिन्होंने विश्वविद्यालय को पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रेरणा बनाने के लिए पर्याप्त धन आवंटित करने की प्रतिज्ञा की। इस चर्चा का समापन दर्शकों की प्रतिक्रियाओं और प्रोफेसर मलकनिया के अंतर्दृष्टिपूर्ण समापन टिप्पणियों के साथ हुआ, जिसमें पर्यावरणीय संरक्षण और सतत जीवन के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण विज्ञान विभागध्यक्ष, डॉ. भास्वती बनर्जी द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने सभी गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिभागियों और आयोजकों को हार्दिक धन्यवाद व्यक्त किया।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय बना ‘ईट राइट कैंपस

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भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफ0एस0एस0आई0) द्वारा गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा को "ईट राइट कैंपस" घोषित किया गया हैl ज्ञात हो कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय एक आवासीय विश्वविद्यालय है जिसमें 5000 से अधिक छात्रों/छात्राओं के छात्रावास में रहने की व्यवस्था है। ईट राइट कैंपस प्रमाणीकरण, खानपान की वस्तुओं की गुणवत्ता हेतु वैज्ञानिक मानक निर्धारण के साथ ही उत्पादन, भण्डारण, वितरण आदि की गुणवत्ता के आधार पर दिया जाता है। एफ0एस0एस0आई0 की इस पहल का उद्देश्य सुरक्षित स्वास्थ्य एवं पोषण युक्त भोजन तंत्र विकसित करना है। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय का 'ईट राइट कैंपस' प्रमाणीकरण अगले 2-वर्ष के लिए वैध होगाI यह प्रमाणीकरण ऐसे संस्थानों को दिया जाता है जहां सुरक्षित, स्वस्थ एवं पोषण युक्त खानपान की व्यवस्था होती हैI यह न केवल विश्वविद्यालय के भोजनालयों में सुरक्षित, स्वास्थप्रद एवं पोषण युक्त होने का प्रमाणीकरण है अपितु भविष्य की दृष्टि से छात्र-छात्राओं में खान-पान संबंधी स्वस्थ आदतें विकसित करने पर जोर देने की प्रतिबद्धता है I इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर रविंद्र कुमार सिन्हा ने विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि पर सभी को बधाई दी और छात्र-छात्राओं का संतुष्टि एवं स्वस्थ् सूचकांक बढ़ाने की दिशा में एक प्रमुख उपलब्धि बताया I उन्होंने विश्वविद्यालय की आवासीय प्रकृति एवं लगभग 5000 छात्र-छात्राओं के यहां आवासित होने की पृष्ठभूमि में स्वस्थ एवं पोषण युक्त भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दियाI उन्होंने छात्रावास अभिरक्षकों एवं मैस संचालक की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण भोजन के साथ ही छात्र-छात्राओं के छात्रावास में रहने के अनुभव को उत्कृष्ट बनाने हेतु भी निर्देशित कियाI माननीय कुलपति जी ने विश्वविद्यालय के भोजनालयों एवं छात्रावासों में विश्वस्तरीय मानक स्थापित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक प्रोफेसर एन. पी. मलकानिया, प्रभारी छात्र कल्याण, मुख्य छात्रावास अभिरक्षक (पुरुष एवं महिला), विभिन्न छात्रावासों के छात्रावास अभिरक्षक तथा कम्पस के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

सीएसजेएम गर्ल्स हॉस्टल, जीबीयू ने समाज सुधारक छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती मनाई

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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में छत्रपति साहू जी महाराज (सीएसजेएम) गर्ल्स हॉस्टल के निवासियों ने 18 मई 2024 (शनिवार) को एक आकर्षक और जीवंत कार्यक्रम के साथ समाज सुधारक छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती मनाई। कार्यक्रम ऊर्जा और प्रेरणा से भरे सीएसजेएम गर्ल्स हॉस्टल के प्राचीन परिसर में भगवान के आह्वान और निशिका शर्मा द्वारा गणपति वंदना के साथ शुरू हुआ। कार्यक्रम में डीन, स्टूडेंट अफेयर्स डॉ. मनमोहन सिंह शिशोदिया (डीएसए), चीफ वार्डन (बॉयज़) डॉ. सुभोजित बनर्जी और चीफ वार्डन (गर्ल्स) डॉ. विदुषी शर्मा विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम में जीबीयू के विभिन्न गर्ल्स हॉस्टल से डॉ. रेनू यादव और अन्य वार्डन भी उपस्थित थीं। कार्यक्रम में सभी विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत मेजबान डॉ. आशा पांडे, वार्डन, सीएसजेएम हॉस्टल के औपचारिक स्वागत भाषण के साथ हुई, जिसमें छत्रपति साहू जी महाराज के जुनून और दृढ़ संकल्प पर प्रकाश डाला गया। सुश्री गरिमा प्रजापति द्वारा साहू जी के जीवन और शिक्षा और सामाजिक समानता, विशेषकर महिलाओं और पिछड़े समुदायों के लिए उनके महत्वपूर्ण योगदान की एक झलक प्रस्तुत की गई। इसके बाद सभा को डीन स्टूडेंट अफेयर डॉ. मनमोहन सिंह शिशोदिया के विचारोत्तेजक शब्दों से संबोधित किया गया। छात्रों को उनकी उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए बधाई दी गई। साहू जी के प्रगतिशील सुधारों और उनके स्थायी प्रभाव को मुख्य वार्डन (बालक) डॉ. सुभोजित बनर्जी ने भी संबोधित किया। मुख्य वार्डन (बालिका) डॉ. विदुषी शर्मा द्वारा विद्यार्थियों को छात्रावास को साफ-सुथरा रखने एवं रखरखाव हेतु प्रोत्साहित किया गया। गरिमा सिंह, निशिका शर्मा और सोनाली द्वारा भारत की विविधता में एकता को दर्शाने वाले जीवंत सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए गए। तेजस्विनी द्वारा एक प्रेरक स्वलिखित कविता का सुंदर पाठ किया गया। छात्रों ने डीएसए और मुख्य वार्डन के साथ एक जीवंत चर्चा में भी भाग लिया, उन्होंने छात्रावास, मेस और अन्य सुविधाओं के बारे में अपनी प्रतिक्रिया साझा की। इस कार्यक्रम ने साहू जी की विरासत की एक मूल्यवान याद दिलाई और छात्रों को अधिक न्यायपूर्ण और न्यायसंगत समाज की वकालत करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. आशा पांडे, वार्डन सीएसजेएम द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन और उसके बाद राष्ट्रगान के साथ हुआI

दुश्‍मनों के मंसूबों को जड़ से नष्‍ट करेगी डिजिटल फोरेंसिक लैब, सीमा पार से आनेवाले ड्रोन का हो सकेगा खात्मा

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इन ड्रोन को एंटी राग ड्रोन टेक्नोलॉजी कमेटी (आरओजीयूई) की ओर से तुरंत मारकर नष्‍ट कर दिया जाता है। उसमें रडार और जैमर डिटेक्शन में दिक्कत आती है और उसका डाटा भी रिकवर नहीं हो पाता जिस वजह से दुश्‍मन के मंसूबों तक आखिर वह ड्रोन उसने क्‍यों भेजा गया उसका पता नहीं लग पाता। साइबर फोरेंसिक लैब नष्‍ट डिवाइस से भी डाटा रिकवर कर सारे जवाब उगलवा लेगी। डिजिटल क्रांति नित नए अध्‍याय लिख रही है। उसी के माध्‍यम से आतंकी संगठनों के मंसूबों को भी पस्‍त किया जा रहा है। एक कड़ी आगे बढ़ते हुए आतंकी देशों द्वारा देश की सीमा पर भेजे जाने वाले ड्रोन के मकसद का भी पता लगाया जा सकेगा। इसके लिए देश की पहली डिजिटल साइबर फोरेंसिक लैब तैयार हो रही है। दुश्मन देश लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर आए दिन ड्रोन के माध्यम से कभी हथियार गिराते हैं तो कभी नशे का सामान फेंकते हैं या फिर रेकी करते हैं। नोएडा स्थित गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में तैयार इस डिजिटल साइबर फोरेंसिक लैब में डाटा रिकवर करने के लिए स्वीडन-इजरायल साइबर टूल का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें डाटा स्ट्रैक्शन टूल को लगाया जाएगा, जिसमें ड्रोन की नष्ट चिप को लगाया जाएगा, इसके बाद उसकी सारी वह जानकारी हासिल होनी शुरू हो जाएगी। इसमें उसकी रिपोर्ट किसके पास है, किस स्थान से उड़ाया गया, ड्रोन के द्वारा कहां-कहां की तस्‍वीरें क्लिक की गईं, कहां भेजी गईं सब राज उगले जाएंगे। डाटा स्ट्रैक्शन वो टूल है, जिसमें नष्‍ट डाटा खुद ही रिकवर हो जाता है। इसी तरह किसी आतंकी या देश के विरुद्ध साजिश रचने वाले किसी आरोपित का नष्‍ट किया हुआ मोबाइल, लैपटाप मिलता है तो उसे भी रिकवर किया जा सकेगा। इसके लिए स्वीडन, इजरायल, अमेरिका के साइबर टूल का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें नष्ट गैजेट के कुछ अंश को डालने के बाद में मैसेज, ई-मेल, फोटो, फाइल समेत अन्य जानकारी हासिल हो सकेंगी।

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